भावतरंग
मनातील विविध भावभावनांचे हळुवार तरंग!! मनीच्या गूजगोष्टी....
Saturday, May 23, 2020
राह-ए-जन्नत
न जाने कितनी थी हसरतें, और कितनी ही ख़्वाहीशें,
आरज़ू थी अक्सर, पूरी हो मांगी हर मन्नत..
पर झिझकसी होती है, जबसे सुना हैं,
ख़त्म हो ख़्वाहीशें जहाँपे, शुरू होती है राह - ए- जन्नत।।
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment