Wednesday, May 27, 2020

लफ़्ज़... (शब्द)

बस दो लफ़्ज़ हैं काफ़ी, किसीको हसानेके लिए,
या बस दो ही लफ़्ज़ कभी, दिल दुखानेके लिए,
बड़ी एहतियातसे कर इस्तेमाल इन्हें तू,
दो लफ़्ज़ हैं काफ़ी, ज़िंदगीका रुख़ बदलने के लिए...

                                                                     

असंच सुुुचलं म्हणून ह्याचंं भाषाांतर पण केेेलंय...


दोनच शब्दही पुरतात कधी, चेहेऱ्यावर हास्य फुलवायला,
आणि दोनच शब्द कधी पुरेसे, नयनी अश्रू आणण्याला,
तर मग जपूनच वापरू हे शस्त्र गडयांनो,
दोनच शब्द समर्थ कधी तरी, आयुष्य संपूर्ण बदलायला...


                                                           - रश्मी
                                                 (27/05/2020)

Sunday, May 24, 2020

ज़िम्मेदारी..

आईना-ए-दिल, हो जाए जब भी धुंधला,
निखारू उसे, ज़िम्मेदारी है मेरी..
मेरे दर्द की है, दवा मेरे अंदर,
समझके, निगलना, ज़िम्मेदारी है मेरी...

फिरुनी मी...

बंद मी होता घरात, शब्द अलगद मुक्त झाले,
कोंडलेल्या भावनांनी, रूप त्यांचे ल्यायले..
भाव माझेच, शब्दही अन, पण नव्याने भेटले,
काय जादू, की कृपा ही, मीच फिरुनी गवसले...

                                                               

Saturday, May 23, 2020

राह-ए-जन्नत

न जाने कितनी थी हसरतें, और कितनी ही ख़्वाहीशें,
आरज़ू थी अक्सर, पूरी हो मांगी हर मन्नत..
पर  झिझकसी होती है, जबसे सुना हैं,
ख़त्म हो ख़्वाहीशें जहाँपे, शुरू होती है राह - ए- जन्नत।।

                                                                

Thursday, May 14, 2020

जागतिक कुटुंब दिन..

जन्माला येतानाच आपण, जोडत असतो अनेक नाती,
विविध स्वभाव, मते विविध, कुटुंब धाग्यात गोवले जाती..

आई, वडील, भाऊ, बहीण, आज्जी आबांचा लळा,
आत्या, काका, मामा, मावश्या, मायेचा गोतावळा!

रक्ताची ही नाती सगळी, सुखदुःखातील सांगाती,
आणि जणू कुटुंबच होती, काही खास मैत्र, सखे-सोबती!

कुटुंब दिनी सदिच्छा, लाभो ह्या सर्वांना सुख परम,
पुढे जमेल का कधी आचरायला, 'वसुधैव कुटुंबकम्'?!

                                                            
                                                                

Wednesday, May 6, 2020

दुआ

यूँही, बिनबात, दर्द देते हैं जो दुसरोंको,
बदलेमें ख़ुदासे भी दर्द ही पाते हैं।
पर फ़ितरत तो देखो उन 'दुसरों'की,
दुआमें ऐसोंके लिये भी ख़ुशी ही मांगते हैं।।

                                                       

Tuesday, May 5, 2020

झुळूक..

अलवार झुळूक वाऱ्याची, अलगद घरात आली,
मुक्त वावर तिचा, ना तिला कुठलाही लॉकडाउन,
सुखद स्पर्शातून जाणीव 'त्या'च्या कृपेची दिली,
अन आली तशीच गेली, गात्र अन गात्र सुखावून...